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Queue Data Structure in Hindi / क्यू डाटा स्ट्रक्चर

Queue एक प्रकार का non-primitive और linear डाटा स्ट्रक्चर है जो FIFO (First In First Out) के सिद्धांत पर कार्य करता है. अर्थात queue में जो भी element पहले में प्रवेश करता है वो element सबसे पहले बाहर आता है, इस प्रवित्ति के कारण इसे FIFO डाटा स्ट्रक्चर कहतें हैं. उदाहरण : टिकेट काउंटर पर लगी लाइन जिसमे जो व्यक्ति पहले लाइन में आता है वो पहले टिकेट प्राप्त करता है. टोल टैक्स पर लाइन में खड़ी गाड़ियाँ. इत्यादी. क्यू का चित्रण: उपरोक्त चित्र में queue को array के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है. यहाँ पर: FRONT :  ये queue के पहले element को प्रदर्शित करता है. ये वो छोर होता है जहाँ से कोई element डिलीट होगा. REAR :  ये queue के अंतिम element को प्रदर्शित करता है. ये वो छोर होता है जहाँ पर कोई element प्रवेश करता है. क्यू में किसी भी समय elements की संख्या  REAR - FRONT + 1 होगी. प्रारंभ में REAR का मान -1 तथा FRONT का मान 0 रखतें हैं. यदि किसी स्थिति में   REAR < FRONT  , अर्थात REAR का मान FRONT से कम है तो क्यू empty/खाली होगा. ...

Stack Data Structure in Hindi / स्टैक डाटा स्ट्रक्चर

Stack एक प्रकार का डाटा स्ट्रक्चर है जो LIFO (Last In First Out) के सिद्धांत पर कार्य करता है. अर्थात stack में जो भी element अंत में प्रवेश करता है वो element सबसे पहले बाहर आता है, इस लिए इसे LIFO डाटा स्ट्रक्चर कहतें हैं. उदाहरण : एक के ऊपर एक रखे प्लेट. जो प्लेट ऊपर होगा वो पहले उठाया जायेगा और कोई प्लेट रखा जायेगा तो वो ऊपर रखा जायेगा. एक के ऊपर एक रखे ताश के पत्ते स्टैक का चित्रण: उपरोक्त चित्र में स्टैक को array के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है. यहाँ पर: MAXSIZE : स्टैक में प्रवेश कर सकने वाले elements की अधिकतम संख्या है. जो कि यहाँ पर 5 है. TOP(Top of Stack) : यह स्टैक के सबसे टॉप पर स्थित element को इंगित करता है. ध्यान रहे कि स्टैक में 5 elements है जिनका index 0 से 4 तक array element के द्वारा प्रदर्शित किये गये हैं. स्टैक ऑपरेशन: १. PUSH (पुश) : इस ऑपरेशन के द्वारा स्टैक के टॉप पर नया element प्रवेश करता है. २. POP(पॉप) : इस ऑपरेशन के द्वारा हम स्टैक के टॉप element को डिलीट करते हैं. नोट: जब स्टैक में MAXSIZE, elements प्रवेश ...

Pointer

Pointer एक प्रकार का वेरिएबल होता है जो मेमोरी एड्रेस को संगृहीत करता है। कहने का मतलब ये है कि pointer मेमोरी के किसी लोकेशन को इंगित करता है जिस पर कोई डाटा अंकित होता है। आगे बढ़ने से पहले हम & ऑपरेटर के बारे में जान लेतें है। & ऑपरेटर का प्रयोग किसी वेरिएबल के मेमोरी एड्रेस को प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यदि हमने किसी वेरिएबल i को डिक्लेअर किया है तो &i उस वेरिएबल का मेमोरी एड्रेस बताता है। तो चलिए आगे बढ़ते हैं और देखते हैं कि pointer को डिक्लेअर और डिफाइन कैसे करते हैं। int i; int *p; i = 5; p = &i; printf("%d", *p); Pointer को डिक्लेअर करने के लिए हम पहले उस डाटा टाइप को लिखतें है जिस डाटा टाइप के मेमोरी एड्रेस को वो इंगित करेगा। मतलब ये कि अगर pointer में हमे किसी int डाटा टाइप के वेरिएबल का मेमोरी एड्रेस संगृहीत करना है तो हम pointer को int डाटा टाइप का डिक्लेअर करेंगे। दूसरे शब्दों में यूं कहें कि pointer को उसी डाटा टाइप का डिक्लेअर करते है जिस डाटा टाइप का डाटा उस मेमोरी में संगृहीत है जिसके एड्रेस को ये pointer इंगित करेगा। डाटा टाइप ...

Array

C प्रोग्रामिंग में array एक प्रकार का डाटा टाइप है जो कि एक ही प्रकार के डाटा टाइप के value को संगृहीत करने के लिए प्रयोग किया जाता है। Array का प्रयोग तब करतें है जब हमें एक ही प्रकार के डाटा टाइप तथा सम्बंधित डाटा का संग्रहण करना होता है। मान लीजिये कि हमें किसी विद्यार्थी के विषयों के अंक को प्रदर्शित करना हो तो हम बिना array का प्रयोग किये इस प्रकार variable को declare करेंगें। int sub1, sub2, sub3, sub4; और विद्यार्थियों की संख्या 2 होतो हमें 8 variable declare करने पड़ेंगें। यहाँ तक तो ठीक है पर अगर कक्षा के 50 विद्यार्थियों के अंक को प्रदर्शित करना हो तो हमे 50X4=200 variable को declare करना होगा जोकि वास्तव में बहुत ही लम्बा और मुश्किल कार्य होगा तथा उनको मैनेज करना भी संभव नहीं है। ऐसी परिस्थिति में array का प्रयोग किया जाता है क्यूंकि विषयों के अंक int डाटा टाइप के होंगे और ये किसी एक विद्यार्थी से सम्बंधित होंगें। Array को declare करना: C प्रोग्राम में हमें जिस array का प्रयोग करना होता है उसे हम पहले declare करते हैं। तो आइये देखते है array को कैसे declare करते हैं...

फंक्शन (function)

C प्रोग्रामिंग में फंक्शन(function) एक ऐसी युक्ति है जिसके माध्यम से हम किसी भी C प्रोग्राम को सरल एवं सहज रूप प्रदान करते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि जब हमें प्रोग्राम की कुछ पंक्तियों को बार बार run/execute करना होता है तो हम उसे फंक्शन के अंदर लिखतें हैं और जहाँ पर उन पंक्तियों को execute करना होता है वहाँ पर उस फंक्शन को कॉल (call) कर लेतें हैं। फंक्शन के माध्यम से हम न केवल पंक्तियों के पुनरावृत्ति से बचतें हैं बल्कि हम इसके माध्यम से प्रोग्राम को छोटे छोटे इकाई में बाँट देतें हैं जिससे हमे प्रोग्राम लिखने और समझने में आसानी होती है। तो चलिए एक साधारण से उदाहरण के माध्यम से फंक्शन को समझने का प्रयास करते हैं। मान लीजिये कि हमें 1 से 5 तक की गिनती 3 बार प्रिंट करनी है तो हम सामान्य रूप से बिना फंक्शन का प्रयोग किये प्रोग्राम को नीचे दिए गए तरीक़े से लिखेंगे। #include <stdio.h> int main(){ int i; for( i = 1; i <= 5; i = i+1){ printf("%d ", i); } for( i = 1; i <= 5; i = i+1){ printf("%d ", i); } for( i = 1; i <= 5; i = i+1){ ...

वेरिएबल डिक्लेरेशन और डेफिनिशन

हमने पिछले पेज पर डाटा टाइप के बारे में पढ़ा। अगर आपने उस पेज पर दी गयी जानकारी को अभी नहीं पढ़ा तो यहाँ क्लिक करें। सी प्रोग्राम में किसी भी जानकारी को संग्रहित करने के लिए वेरिएबल variable ( हिंदी में वेरिएबल को चर बोलते हैं परन्तु हम आगे वेरिएबल का ही प्रयोग करेगें) का प्रयोग कारते हैं। अगर आपको कोई भी वेरिएबल प्रयोग करना हो तो सी प्रोग्राम में पहले आपको प्रोग्राम में लिख कर बताना पड़ता है कि आप इस वेरिएबल का प्रयोग करने वाले हैं। इस प्रक्रिया को variable declaration कहते हैं। तो आये देखते हैं कि वेरिएबल डिक्लेअर कैसे करते हैं- int num; जैसा कि अपने ऊपर देखा कि वेरिएबल डिक्लेअर करने के लिए पहले उसका datatype फिर space और फिर उस वेरिएबल का नाम लिखते हैं। हमने वेरिएबल तो डिक्लेअर तो कर दिया परंतु num वेरिएबल में अभी कोई मान संग्रहित नहीं है। वेरिएबल में मान संग्रहित या assign करने की प्रक्रिया वेरिएबल definition कहलाती है। तो आइए देखते हैं कि डिक्लेअर वेरिएबल को डिफाइन कैसे करते हैं: num = 1; जैसा कि अपने ऊपर देखा कि वेरिएबल डिफाइन करने के लिए पहले उस वेरिएबल का नाम फ...

डाटा टाइप

अगर आप को किसी बच्चे का अंकपत्र बनाना हो तो उसमें आपको उसका नाम जैसे 'Rahul Singh', कंप्यूटर विषय का प्राप्तांक जैसे '90', उसका प्रतिशत जैसे '88.75%', प्रतिशत के अनुसार ग्रेड जैसे 'A' इत्यादि अंकित करना पड़ता। बस इसी प्रकार यदि यही काम सी प्रोग्राम में करना हो तो उन छात्रों के नाम, प्राप्तांक, प्रतिशत को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न प्रकार के युक्ति की आवश्यकता पढ़ती है, जिन्हें ही डाटा टाइप कहते है। वेरिएबल को डिक्लेअर करने से पहले उनका डाटा टाइप बताना होता है इसलिए सब से पहले इन डाटा टाइप की जानकारी कर लेना आवश्यक है। सी प्रोग्रामिंग में प्रयोग में आने वाली कुछ ज़रूरी डाटा टाइप इस प्रकार हैं: क्रम डाटा टाइप कीवर्ड संकेत प्रयोग १ integer (पूर्णांक) int %d इसका प्रयोग पूर्णांक को प्रदर्शित करने के लिए होता है। जैसे - 38, 9, -8 आदि २ Decimal (दशमलव संख्या) float %f इसका प्रयोग दशमलव संख्या को प्रदर्शित करने के लिए होता है। जैसे- 1.7f, 4.0f, 3.876f आदि। float को प्रदर्शित करने के लिए संख्या के बाद f लगाना आवश्यक है।  ३ Char...